रोगी मूत्र परीक्षा | Urine Examination according to Ayurveda
रोगी मूत्र परीक्षा • मूत्र का सैंपल कैसे ले वैद्य को उचित है कि चार घड़ी के तड़के रोगी को उठाकर काँच के सफेद बर्तन में अथवा कांसे के पात्र में प्रथम धार छोड़ कर मुतावे । फिर उस बामन को कपड़े से ढककर रक्खे। सूर्योदय होने के पीछे वैद्य उसकी परीक्षा करे । *परीक्षा 1️⃣ यदि रोगी का मूत्र पानी के सदृश हो, बहुत हो, कुछ नीला भी होय तो वायु के विकार का मूत्र जानिए। 2️⃣ जो मूत्र लाल कुसुम के सदृश होकर गर्म अथवा पीला टेसू के फूल के रंग के सदृश और थोड़ा उतरे तो गर्मी के रोगी का मूत्र जानिए। 3️⃣ जिस रोगी का ठण्डा, सफेद और चिकना मूत्र उतरे उसे कफ का रोगी जानिए । # साध्य रोग - चार घड़ी के तड़के का रोगी का मूत्र चार घड़ी तक धूप में रखने के पीछे वैद्य उसमें तेल की बूँद डाले। जो तेल की बँद मूत्र के ऊपर फैल जाय तो उस रोगी को साध्य जानिए और वह अच्छा हो जाएगा # कष्ट साध्य रोग - जो तेल की बूँद मूत्र के ऊपर न फैले और स्थिर होकर रह जाय तो उस रोगी को कष्टसाध्य जानिए । # असाध्य - यदि वह बूँद मूत्र में गिरने से चक्र के सदृश घूमती हुई डूब जाय तो वह रोगी अवश्य मरे। ओर जिस र...